न्याय
मोहब्बत जितनी है मुझमें
नफ़रत भी उतनी ही रखती हूं
ये फैसला तुम्हारा है
तुम क्या पाना चाहोगे
मैं तो बस ये जानती हूं
जो भी पाओगे मुझसे, भरपूर ही पाओगे।
तख़्त
जब नहीं होता कुछ करने को,
तब
बरामदे पर अपने ‘तख़्त‘ पर बैठ
बुनती हूं
एक ऐसी सपनीली दुनिया
जो है सिर्फ...
और सिर्फ मेरी।
प्रतीक्षा
हॉं, करती हूं मैं उसकी
प्रतीक्षा
रखती हूं उस मार्ग पर दृष्टि
जहांॅं से वह गया
फिर कभी न आने का कहकर।
सारा आकाश
सुनो!
ये दीवारें, ये चौख़ट
नहीं है तुम्हारा पूरा आकाश
याद रखो
समय के साथ परंपरा की ओढ़नी
आदर्श की बेड़ियां
झुका देगीं तुम्हारे कंधों को
इसलिए उठो
और नाप डालो वो सारा आकाश
जिन पर तुम्हारी नन्हीं अंगुलियां
खींचा करती थी अपने
सपनों का संसार।
मंत्र
ऊॅं नमः शिवाय्!
यही प्राण वायु है
मेरे
अवचेतन देह का
और यही है मेरे
जीवन और मृत्यु के मध्य
का एकमात्र
परम दर्शन।

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