Tuesday, September 21, 2021

मेरी बेटी !

तुम्हें कोई गौर से देखेगा
तो ढूंढ ही लेगा मुझको,
लेकिन नही ढूंढ सकेगा तुम में छिपे 
उस कोलाहल को 
जो दुबक कर बैठ जाता है
तुम्हारे चेहरे की मोहक 
मुस्कान, दिव्य आभा और 
तुमसे निकलते तेज
प्रकाश पुंज के पीछे
यही हो तुम...
सिर्फ 'यही', अपने वास्तविक रूप में
रक्त संबधों की जटिलता, 
पहचान और उनके अस्तित्व की 
आंच से परे,
ये गढ़ा है तुमने ख़ुद से 
यही तुम्हारी अपनी पहचान है
यूँ ही रहो, ऐसे ही बढ़ो
ऐसे ही फलो 
मेरे रक्त में पली
मेरी गुलाब सी कली
सच कहूं तो
मुझे अच्छा लगता है
ये सुनना
देखो ये इरिशिका की माँ है!!!


बेटी के जन्मदिवस पर लिखे मेरे मनोभाव!


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