Sunday, December 13, 2020

स्मृतियों का बक्सा!



मैंने स्मृतियों के बक्से में
संजो कर रखा है बहुत सी यादों को,
छुपा रखा है जिसमें,
शहनाई की उस सुमधुर आवाज को... 
जिनकी स्वर लहरियों के बीच, 
तुम दोनों एक बंधन में बंधे थे।

तुम्हारी गृहस्थी की उस 
पोटली को भी रखा है बड़े संभाल,
जब तुम दोनों, अपने में मगन,
प्रेम और समर्पण भरे रंगों की बाल्टी से... 
रंग रहे थे 
अपना घर-संसार।

सहेज के रखा है उन उल्लास के 
पलों को भी, 
जो पहली किलकारी के साथ... 
हम सब के चेहरों पर, 
उजास होकर फैल गई थी।

रखे है वे सारे पल भी संभाल के,
जब-जब तुमने एक-दूसरे को... 
संभाला-संवारा-निखारा, 
और गढ़ दिया अपने दांपत्य जीवन का, 
सुखद-सुरीला संगीत।

दूर होते जा रहे अपनों के सबंधो के बीच, 
तुम्हारे बीच के सम्बन्धों की
गहराई और समझ के हर पल की, 
पुड़ियां है मेरे
इस बक्से में बंद। 

लेकिन सुनो! 
अभी रखनी है मुझे 
कुछ और...तुमसे जुड़ी सुखद स्मृतियां, 
जीवन की सांझ होने तक या फिर
मेरे चिरनिद्रा में चले जाने तक।

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