भरोसा
नन्ही सी उंगलियां
मासूम सी मुस्कान लिए
कस के पकड़ी थी
मेरा हाथ
चमकती आँखों में यकीन
सुरक्षित हूँ माँ!
मैं तेरी गोद में...
परिपक्व हो चली नन्ही उंगलियां
आत्मविश्वास से भर चुकी
उन आँखों की चमक
मुस्कान में ये अहसास
पकड़ रखा है,
मत घबराना माँ!
सुरक्षित है
तू इन हाथों में...।
चरित्र
देखा है तुम्हें
ऋतुओं की तरह बदलते
अंतर है तो बस इतना
ऋतुएं पलट के आएगीं
लेकिन
तुम नहीं
मौन
एक दीर्घ श्वास
और फिर
कभी न खत्म होने वाला मौन।
निःशब्द रह गये तुम
और तुम्हारा
पश्चाताप
No comments:
Post a Comment